दिल्ली एक बार फिर एक दर्दनाक हादसे की गवाह बनी है। दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक पांच मंजिला इमारत अचानक ढह गई, जिसमें कई लोग मलबे में दब गए। इस हादसे ने न केवल कई परिवारों की खुशियां छीन लीं, बल्कि राजधानी में चल रहे अवैध निर्माण और पीजी (पेइंग गेस्ट) संस्कृति पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आइए जानते हैं इस पूरे हादसे की विस्तृत कहानी, शुरुआत से लेकर अब तक।
कैसे हुआ हादसा
यह घटना दिल्ली के मोती बाग इलाके से सटे सत्य निकेतन में घटी, जहां एक पांच मंजिला इमारत का इस्तेमाल छात्रों के लिए पेइंग गेस्ट यानी पीजी हॉस्टल के रूप में किया जा रहा था। स्थानीय लोगों और जांच में सामने आई जानकारी के मुताबिक, हादसे के वक्त इमारत के बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर पर मरम्मत व रेनोवेशन का काम चल रहा था। बताया जा रहा है कि बरसात के बाद बेसमेंट और इमारत की नींव में पानी भर गया था, जिससे संरचना कमजोर हो गई। इमारत तीन तरफ से बिना किसी सहारे (सपोर्ट) के खड़ी थी, और नीचे से खुदाई का काम भी चल रहा था। इन सभी कारणों ने मिलकर इमारत की नींव को इतना कमजोर कर दिया कि वह अचानक भरभराकर ढह गई।
हादसे के वक्त इमारत में कई छात्र और अन्य किरायेदार मौजूद थे, जो कोचिंग या पढ़ाई के सिलसिले में यहां रह रहे थे। इमारत के ठीक नीचे एक बुजुर्ग व्यक्ति अपना छोटा-सा स्टॉल लगाकर बैठा था, जिसका सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया, जिसमें इमारत को अचानक ढहते देखा जा सकता है।
रेस्क्यू ऑपरेशन: 27 घंटे तक चला बचाव अभियान
हादसे की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें तुरंत मौके पर पहुंच गईं। मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका के चलते बचाव अभियान बड़े पैमाने पर शुरू किया गया। भारी मशीनों, ड्रिलिंग उपकरणों और खोजी कुत्तों की मदद से मलबा हटाने का काम किया गया, ताकि दबे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
यह रेस्क्यू ऑपरेशन करीब 27 घंटे तक लगातार चला। इस दौरान बचाव दलों ने कुल मिलाकर एक दर्जन से अधिक लोगों को मलबे से बाहर निकाला और उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया। कुल 12 लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया, जिनमें से कुछ को घटनास्थल पर ही गंभीर चोटें आई थीं। लंबे और मुश्किल प्रयासों के बाद आखिरकार दिल्ली पुलिस ने रेस्क्यू ऑपरेशन के पूरा होने की घोषणा की।
मौतों और घायलों का आंकड़ा
इस हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें ज्यादातर संख्या छात्रों की बताई जा रही है। मृतकों में से पांच युवा छात्र थे, जो पढ़ाई या कोचिंग के सिलसिले में इस पीजी में रह रहे थे। इसके अलावा 5 से 6 लोग घायल हुए हैं, जिनका फिलहाल अस्पतालों में इलाज चल रहा है। घायलों में से कुछ की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है, और डॉक्टर उनकी हालत पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
इस हादसे ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। सामने आई जानकारी के अनुसार, कुछ पीड़ित परिवार अपने बच्चों के अंतिम पलों की यादों और वीडियो कॉल को याद कर भावुक हो उठे। एक पीड़ित परिवार के मामले में तो बेटे की मौत के बाद परिवार ने उसकी आंखें दान करने का फैसला लिया, जो इस दुखद घटना के बीच भी मानवता की एक मिसाल बनकर सामने आया।
बिल्डिंग मालिक की तलाश और गिरफ्तारी
हादसे के तुरंत बाद पुलिस ने इमारत के मालिक के खिलाफ जांच शुरू कर दी। दिल्ली पुलिस की जांच में सामने आया कि इमारत के मालिक की पहचान हरिराम गुप्ता (जिन्हें कुछ रिपोर्टों में हरिराम बंसल भी बताया गया) के रूप में हुई है। हादसे के बाद मालिक और उसका परिवार फरार हो गया था, जिसके चलते पुलिस ने उसके खिलाफ लुक आउट सर्कुलर (एलओसी) जारी किया और कई जगहों पर छापेमारी की। आखिरकार बिल्डिंग मालिक को राजस्थान से गिरफ्तार किया गया।
पुलिस ने भवन मालिक और अन्य आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया, जिनमें गैर-इरादतन हत्या से जुड़ी धारा, निर्माण या मरम्मत के दौरान लापरवाही से जुड़ी धारा, और लोगों की जान को खतरे में डालने से जुड़ी धारा शामिल है। बाद में अदालत ने बिल्डिंग मालिक और उसकी पत्नी को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया
हादसे की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता खुद घटनास्थल पर पहुंचीं और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि बेसमेंट में पानी भरने की वजह से यह हादसा हुआ और सरकार पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने यह भी ऐलान किया कि हादसे वाली इमारत के पड़ोस में स्थित असुरक्षित इमारत को भी गिराया जाएगा।
इस हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के पांच अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया, क्योंकि जांच में लापरवाही और नियमों की अनदेखी के सबूत मिले। मुख्यमंत्री कार्यालय ने दिल्ली भर में अवैध रूप से बनी पांच मंजिला इमारतों को तुरंत सील करने के निर्देश भी जारी किए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। बताया गया कि बीते तीन महीनों में ही दिल्ली में सैकड़ों अवैध इमारतों पर कार्रवाई की जा चुकी है, जिनमें कुछ को गिराया गया और कुछ को सील किया गया, फिर भी सत्य निकेतन जैसी घटनाएं यह दिखाती हैं कि जमीनी स्तर पर निगरानी अब भी कमजोर है। घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश भी दिए गए हैं, ताकि जिम्मेदारी तय की जा सके।
पहले भी हो चुका है ऐसा हादसा
सत्य निकेतन के स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इस इलाके में करीब तीन साल पहले भी इसी तरह की एक घटना हो चुकी थी, लेकिन प्रशासन ने उस घटना से कोई सबक नहीं लिया। निवासियों का कहना है कि नेताओं और पीजी मालिकों की आपसी सांठगांठ की वजह से अवैध निर्माण बेरोकटोक चलता रहा, और नियमों की खुलेआम अनदेखी होती रही। इससे यह सवाल उठता है कि क्या स्थानीय प्रशासन समय रहते चेत गया होता तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था।
हादसे ने खोली सुरक्षा व्यवस्था की पोल
इस दुर्घटना ने राजधानी दिल्ली में चल रहे पीजी और हॉस्टल कारोबार की सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियां उजागर कर दी हैं। सवाल उठ रहे हैं कि क्या पीजी संचालकों के पास ज़रूरी अनुमति और अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र होते हैं, क्या ऐसी इमारतों की समय-समय पर संरचनात्मक सुरक्षा जांच होती है, और क्या मरम्मत या निर्माण कार्य के दौरान विशेषज्ञों की निगरानी सुनिश्चित की जाती है। सत्य निकेतन इलाका दिल्ली विश्वविद्यालय के करीब होने के कारण हजारों छात्रों का ठिकाना है, और यहां सैकड़ों की संख्या में पीजी और हॉस्टल चल रहे हैं, जिनमें से कई बिना उचित अनुमति के संचालित हो रहे हैं।
आगे की राह
सत्य निकेतन हादसे ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि शहरों में अवैध निर्माण, प्रशासनिक लापरवाही और नियमों की अनदेखी कितनी भारी कीमत चुका सकती है। सात परिवारों ने अपने बच्चों और अपनों को हमेशा के लिए खो दिया, जबकि कई अन्य अब भी अस्पतालों में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस हादसे से सबक लेकर वाकई ठोस कदम उठाता है, या यह भी बाकी घटनाओं की तरह कुछ दिनों की सुर्खी बनकर रह जाएगा।
यह एक अत्यंत संवेदनशील और दुखद विषय है। अगर आप या आपका कोई परिचित इस घटना से प्रभावित होकर मानसिक तनाव या सदमे से जूझ रहा है, तो किसी काउंसलर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करना सहायक हो सकता है।
